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प्रतिमा के सामने आते की फफक कर रो पड़े शहीद के पिता

प्रतिमा के सामने आते की फफक कर रो पड़े शहीद के पिता

गले लगाकर बयां किया अपना दर्द

आकाश सिंह, मयूरहंड : सीने में दबे दर्द को बताए तो किसको। किसके पास बताए तेरे जाने के बाद मेरी क्या हालात है। कौंन सुनेगा। किसको सुनाए। तू रहता तो मैं और तेरी माँ आज तेरी याद में आँसू नहीं बहाते। जब जब ये दिन आता है शरीर से कलेजा निकल कर बाहर आ जाता है। क्या करू बेटा तू जो मेरे पास नहीं है। शायद यही बात शहीद के पिता संत सिंह पुत्र के आदमकद प्रतिमा को गले लगाने के बाद बोल रहे हो। पिता के आँखो से झलकता आंसू पिता के सीने में छपा दर्द को बयां कर रहा था। सभी निगाहें शहीद के पिता पर टिकी थी। जैसे ही शहीद के पिता ने अपने पुत्र के गले में माला डाला पिता का सब्र हिलकोरे मार उठा। पिता ने शहीद के प्रतिमा को गले लगा लिया। जिससे देख कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगो के आँखो से आंसू की धार बह उठी। सभी ने इस क्षण को अपने अपने मोबाइल में कैद करने से नहीं रोक पाए। मानो उस समय ऐसा लग रहा हो जैसे वर्षो से बिछड़े बाप बेटा मिले हो। शहीद के पिता ने पुत्र के प्रतिमा पर हाथ फेरते हुए पुत्र के दुःख को महसूस किया। आँखो से झलकते आंसू ने पूरा माहौल को गमगीन कर दिया। मौके पर उपस्थित समाजसेवी संजय सिंह ने शहीद के पिता को सभालते हुए ढाढस दिलाई। बीडीओ ने शहीद के पिता को संभालते हुए मंच पर बैठाने का कार्य किया। कार्यक्रम में आए सभी लोगो ने शहीद के पिता के धर्य को नमन किया।

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