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लॉगडाउन बना वरदान,ढाई दशक के बाद परती खेतों में धान रोपनी - आकाश



लॉगडाउन बना वरदान,ढाई दशक के बाद परती खेतों में धान रोपनी


आकाश सिंह,मयूरहंड : हां सही सूना। कुछ ऐसा ही मामला प्रखंड के धनगांवा गांव से आया है। जहां वर्षो बाद धान के बिछड़े खेतों में फेके जा रहे है। धान के बिछड़े को रोपनी अपने गीतों के साथ खेतों में रोपने का कार्य में लगी है। प्रखंड मुख्यालय से दो किलो मीटर की दुरी पर स्थित गांव के किसान इस बार बारिश के बाद से ही खेतों को तैयार करने के साथ रोपा कराने में लगे है। जानकारी के अनुसार गांव में कुल 200 एकड़ से अधिक खेती योग भूमि है। जिस खेतों में वर्षो से धान का रोपा नहीं हो रहा था। किसान उन खेतों में धान बुनकर फसल पैदा करते थे। परन्तु इस बार गांव के किसानों ने बैठक कर फसल बुनने के बजाय रोपा करने को लेकर खेत तैयार करने में लग गए। किसानों ने बैठक कर सभी उपजाऊ भूमि पर धान के बिछड़े रोपने का निर्णय लिया। शिक्षक सह सफल किसान सुन्दर सिंह ने बताया की गांव के अधिकांश किसान पानी की सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं होने व गांवो से रोजगार की तलाश में शहरों में पलायन करने से बाद से खेतों को परती ही छोड़ दिया था। जिसे देख गांव में रहने वाले किसान भी खरीफ की फसल खानापूर्ति के नाम पर किया करते थे। किसानों की घटती संख्या को देख गांव में धान का रोपा नहीं होने लगा। गांव में बचे किसान किसी प्रकार खाने तक ही धान का पैदा करने में लग रहे। मगर इस बार लॉग डाउन ने गांव की सूरत बदलने का भरपूर प्रयास किया। लॉग डाउन लगाने के बाद शहरों में रोजगार की तालाश में गए किसान अपने गांव में लौट आये। गांव में लौटने के बाद अपने अपने पुर्वजो की जमींन पर फसल उगाने का मन बनाया। शहरो से लौटे किसानों को खेतों में काम करता देख गांव में रहने वाले किसान भी अपने खेतों में लग गए। बताते चले की किसानों की मेहनत से गांव की सूरत बदलने लगी है। किसान दिन रात आपने खेतों में लगे है। किसानों का कहना है की अपने पुर्वजो की जमींन ही रोजगार का साधन बनेगी। वही किसान गांव के सभी खेती योग भूमि में धान की फसल लहलहाने में लग गए है। जो एक सुखद आनंद दे रहा है।

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