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अनूठी परंपरा,कंधे पर विसर्जन को जाती है माता रानी

अनूठी परंपरा,कंधे पर विसर्जन को जाती है माता रानी
80 वर्षो से परम्परा है जीवित

आकाश सिंह

मयूरहंड : माता रानी के प्रतिमा का विसर्जन भी अद्भुत परम्परा के साथ किया जाता है। जिसे देखने आस पास के दर्जनों गांवो के ग्रामीण पंहुचते है। माता रानी का विसर्जन भक्त अपने कंधों पर लेकर जाते है। जो आकर्षण का केंद्र होता है। भक्त माता रानी को कंधे लगाने को लेकर उमड़ पड़ते है। सभी अपने अपने कंधे पर माता की प्रतिमा को उठाने को लेकर ललाहित रहते है। माता को कंधे पर विसर्जन को लेकर चलने का परंपरा आठ दशक पुराना है। जो आज भी पूरे भक्ति भाव से पूरा किया जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि माता की प्रतिमा को कंधा लगाने से सारे दुख दूर हो जाते है। वही दिल से मांगी मुरादे पूरी होती है। भक्त माता रानी को लेकर लगभग एक किलोमीटर का सफर तय करते है। जिसके बाद प्रतिमा को स्टेडियम में रखा जाता है। जहां श्रदालु पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर वरदान मांगती हैं। विसर्जन के समय प्रतिमा के साथ साथ आसपास गांव की दर्जनों महिलाएं विदाई का गीत गाते हुए साथ साथ चलती है। प्रतिमा विसर्जन का दृश्य देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी की बेटी की विदाई हो रही हो। प्रतिमा विसर्जन का समय बड़ा दुख भरा होता है। सभी की आंखों से आंसू झलक पड़ते है। सभी माता को निहारते नही थकते है। बताते चले कि जहां अन्य स्थानो पर लोग वाहनों से प्रतिमा का विसर्जन करते है। वही मयूरहंड में वर्षो की परंपरा आज भी जीवित है। प्रतिमा के विसर्जन से पहले अंतिम आरती का आयोजन किया जाता है जिसमे सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालू शामिल होते है। प्रतिमा का स्टेडियम के निकट काली पोखर में विसर्जित किया जाता है। 

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