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पिता ने पुत्र की प्रतिमा को दुलार कर चूमा_Chatra

पिता ने पुत्र की प्रतिमा को दुलार कर चूमा

आकाश सिंह

ऐसी क्या खता हो गयी मुझसे जो इतनी दूर चले गए तुम। पुत्र की प्रतिमा को देख कुछ ऐसा ही सोच कर दुलारते दिखे शहीद के पिता। आंखों से छलकते आंसू पिता के गम को बांया कर रहा था। लेकिन अपने बहते आंसू को छिपाते पिता बार बार उसे पोछते। फिर पुत्र की प्रतिमा पर हाथ फेरते और मन ही मन बहुत कुछ बोल देते। कभी प्रतिमा की गाल को सहलाते,तो कभी टोपी को सीधा करते। ऐसा लग रहा था जैसे पिता और पुत्र में कुछ बातें हो रही हो। पिता अपने पुत्र को अपने गम बताने का कार्य कर रहे हो। पिता व पुत्र का मिलन देख सभी की आंखे भर आयी। सभी के रोंगटे खड़े हो गए। ऐसे लगा जैसे समय ही रुक गया है।।

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