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तुझे सूरज कहूं या चंदा मेरा नाम करेगा रौशन जग में मेरा राज दुलारा_Mayurhand_Chatra

तुझे सूरज कहूं या चंदा मेरा नाम करेगा रौशन जग में मेरा राज दुलारा

आकाश सिंह

मयूरहंड : तुझे सूरज कहु या चंदा तुझे दीप कहूं या तारा। मेरा नाम करेगा रौशन जग में मेरा राज दुलारा। सन 1969 में एक फूल दो माली फ़िल्म में बजा माना डे द्वारा गाया यह गाना पूरी तरह से शहीद शक्ति सिंह पर सटीक बैठता है। जिस पुत्र को कभी अपने गोद मे खेलाते व लोरी सुना कर सुलाते रहने वाले पिता जब पुत्र की प्रतिमा के समाने आते है तो पिता का ह्रदय दर्द से कहर उठता है। पिता की आंखों से नही चाहते हुए भी नीर की धारा प्रवाहित होने लगती है।जिसे देख आसपास उपस्थित ग्रामीणों की भी आँख भर जाती है। पिता पुत्र के प्रतिमा पर हाथ फेरते रहे। कभी गाल को छू कर तो कभी माथे को पोछ कर। पिता बार बार पुत्र की प्रतिमा को देख कर फफक उठते। रोने भी क्यों नही। जिसे बेटे ने साथ बैठ कर कई सपने देखे थे। वही अब सपना बन कर गया। पिता अधिवक्ता संत सिंह जब भी मयूरहंड से गुजरते है तो पुत्र की प्रतिमा को निहारते हुए घण्टों प्रतिमा के पास बैठकर मन ही मन बातें करते है। ऐसा लगता है जैसे पुत्र को घर की सारी कहानी बता रहे हो। माँ की स्थिति, घर की स्थिति, दोस्तो के हालात सहित अन्य बातें। पिता व पुत्र को एक साथ देख सभी लोग चर्चा करते नही थकते है।। 

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